आज से गूंजेंगे बैंड-बाजे, शुरू होंगे शुभकाम

19

बीकानेर। हिन्दू शास्त्रों व धर्म में देव उठनी एकादशी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से अब तक रुके विवाह समारोह तथा मांगलिक कार्य शुरु हो जाएंगे। इसको लेकर लोग खासे उत्साहित है। मन्दिरों में अनेक कार्यक्रम होंगे। वही पश्चिमी राजस्थान के हरिद्वार माने जाने वाले महर्षि कपिल मुनि की तप स्थली श्रीकोलायत में इसी दिन से पांच दिवसीय वार्षिक मेले का आगाज होगा। इसको लेकर लोग गुरुवार को दिनभर तैयारियों में जुटे रहे। यही नहीं इस दिन से ऋतु परिवर्तन के साथ न केवल देवालयों में अवस्थित देवी-देवताओं की पोशाक में बदलाव आएगा, बल्कि उनको चढ़ाया जाने वाले चढ़ावे में भी परिवर्तन होगा। मन्दिरों के खुलने व बंद होने तथा मन्दिरों में अल सुबह तथा शाम को होने वाली महाआरती में भी बदलाव आएगा। हाल फिलहाल हसको लेकर बाजारों में भी गुरुवार को रौनक नजर आई।
अबूझ सावा है देवउठनी एकादशी
ेंअक्षय तृतीया की तरह देवउठनी एकादशी भी विवाह समारोह के लिए अबूझ सावा माना जाता है। इस दिन मोहल्लों यहां तक गली-गली में विभिन्न समाज के लोगों के घरों में दूल्हा-दुल्हन सात वचनों के साथ एक-दूजे के साथ परिणय सूत्र में बंधेंगे। जबकि इन विवाह समारोह को लेकर कार्यक्रम पहले ही शुरु हो चुके है। किंतु जीवन के विवाह जैसे अहम कार्य के लिए इसी दिन का लोगों को इंतजार रहता है।
होगा तुलसी व सालगराम का विवाह
नत्थूसर गेट स्थित राधानानी कुंज परिवार की ओर से शुक्रवार को कार्तिक मास की देवठनी एकादशी परं तुलसी विवाह का आयोजन किया जायेगा। तुलसी विवाह के उपलक्ष्य पर गुरुवार को हिन्दू रीति अनुसार मां तुलसी और भगवान सालगरामजी के हाथकाम व गणेश परिक्रमा का आयोजन किया गया।
आज से मांगलिक कार्य शुरु
ेंदेव उठनी एकादशी से पहले ऐसा माना जाता है कि यह समय देवी-देवताओं के विश्राम व आराम का समय होता है। ऐसे में शादी विवाह सहित कई प्रकार के मांगलिक कार्य भी नहीं होते है। देव उठनी एकादशी के साथ गृह प्रवेश, नवजात शिशुओं के नामकरण, नव प्रतिष्ठान का उद्घाटन, विवाह समारोह सहित अनेक मांगलिक कार्य शुरु हो जाएंगे।
पांच दिवसीय कोलायत मेले का आगाज
संत परम्परा के अनुसार देवउठनी एकादशी पर महर्षि कपिल मुनि की तप स्थली पर देव उठनी एकादशी के अवसर पर कपिल मुनि मंदिर के आगे तथा कपिल सरोवर के मुख्य घाट पर धर्म ध्वजारोहण के साथ पांच दिवसीय श्रीकोलायत मेले का आगाज होगा। इससे पहले विभिन्न मठों, आश्रमों, अखाड़ों में देश भर से पहुंचे संत महात्मा परम्परागत वाद्ययंत्रों के साथ श्रीकोलायत में शोभायात्रा निकालेंगे।