निजी स्कूल शिक्षकों पर भरोसा नहीं सरकार को

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डीएनआर रिपोर्टर.बीकानेर
प्रीडीएलएड परीक्षा के माध्यम से राज्य सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उसे निजी स्कूलों के शिक्षकों पर भरोसा नहीं है। यही कारण है कि इस परीक्षा का संचालन तो निजी स्कूलों में होगा, लेकिन वहां शिक्षक सरकारी स्कूल के ही ड्यूटी देंगे। इसके साथ ही गुरुवार को निदेशालय ने सख्ती बरतते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को परीक्षा संपन्न होने तक मुख्यालय नहीं छोडऩे के आदेश दिए हैं।
पिछले दिनों प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी निजी स्कूल के शिक्षक को वीक्षक की जिम्मेदारी नहीं दी जाए। बीकानेर जिले की ५६ निजी स्कूलों को विभाग ने परीक्षा केंद्र तो बनाया है लेकिन वहां पहले से काम करने वाले शिक्षकों को परीक्षा ड्यूटी से दूर रखा है। विभाग का आदेश है कि विद्यालय के प्रधानाचार्य व केंद्राधीक्षक को सहायक केंद्राधीक्षक के रूप में काम करना होगा। विद्यालय के किसी भी शिक्षक को ड्यूटी पर लगाने के बजाय आसपास के सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों को ड्यूटी पर लगाया जाएगा। इससे निजी स्कलों में काम करने वाले शिक्षकों में आक्रोश है।
बोर्ड परीक्षा की कॉपी भी नहीं
इससे पहले राज्य सरकार ने निजी स्कूल के शिक्षकों को बोर्ड की उत्तरपुस्तिकाएं देने से भी इनकार कर दिया। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर से पहले निजी स्कूलों के शिक्षक भी उत्तरपुस्तिकाओं की जांच करते थे। पिछले कुछ सालों से उन्हें कॉपी नहीं दी जा रही।
अगली बार नहीं देंगे स्कूल
उधर, निजी स्कूलों के संगठनों ने निर्णय किया है कि वो अगली बार से अपने स्कूल परीसर ऐसी किसी परीक्षा के लिए नहीं देंगे, जिसमें उनके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगे। निजी स्कूलों के संगठन पैपा के संयोजक गिरीराज खैरीवाल ने कहा है कि जब सरकार संसाधन का उपभोग कर रही है तो मानव श्रम का उपयोग करने में क्या परेशानी है। अगर कोई शिक्षक नकल करवाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। क्या गारंटी है कि सरकारी स्कूल के शिक्षक नकल नहीं करवाएंगे?
नियम सभी पर एक
निजी स्कूलों में काम करने वाले शिक्षक भी सरकारी स्कूल के शिक्षक की तरह ही काम के प्रति जिम्मेदार होते हैं। अगर गलती करते हैं तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है, पुलिस कार्रवाई हो सकती है। फिर ड्यूटी लगाने में भेदभाव को साजिश करार दिया जा रहा है।
अन्य परीक्षाओं में भरोसा
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में निजी स्कूल के शिक्षकों की ड्यूटी लगती है लेकिन प्रीडीएलएड परीक्षा में अविश्वास खड़ा हो गया है। निजी स्कूल संगठनों का आरोप है कि ड्यूटी के चंद रुपए निजी स्कूल के शिक्षकों को नहीं मिल सके, इसलिए सरकारी शिक्षा अधिकारियों ने ऐसे निर्णय किए हैं।