पूर्व प्राथमिक शिक्षा के बिना हाईटेक होंगे आंगनबाड़ी

-महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से तैयार किए गए एप पर अपलोड की जा रही केन्द्रों की तमाम जानकारी
बीकानेर। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से आंगनबाडिय़ों पर डिजीटलाइजेशन की परत चढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इन केन्द्रों पर पूर्व प्राथमिक शिक्षा अब भी कागजों में ही सिमटी हुई है। निजी प्ले स्कूलों की तर्ज पर चार साल पहले आंगनबाड़ी के बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा की योजना बनाई गई थी, जो आदेशों के बावजूद सिरे नहीं चढ़ पाई है। अब केन्द्रों के अधिकांश गतिविधियों का डाटा मोबाइल पर फीड कर ऑनलाइन किया जा रहा है। इसके तहत अब आंगनबाडियों पर लम्बे समय से उपयोग में लिए जा रहे 11 प्रकार के रजिस्टरों को बंद कर दिया गया है। हालांकि अब भी दो-तीन तरह के महत्वपूर्ण रजिस्टरों का संधारण किया जाएगा। अन्य 11 भौतिक रजिस्टर एक अप्रेल से बंद कर दिए गए हैं। वहीं लाभार्थी बच्चों के बाल आधार कार्ड बनाए जाएंगे। साथ ही बच्चों का वजन त्रैमासिक के स्थान पर प्रतिमाह लिया जाएगा।
एप बनेगा सहयोगी
आंगनबाड़ी केन्द्र पर पोषाहार स्टॉक व वितरण रजिस्टर, मानदेय कार्मिकों की उपस्थिति रजिस्टर व प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के रजिस्टर यथावत पूर्वत चालू रहेंगे। सभी केन्द्रों पर विभाग की ओर से निर्धारित एकल मासिक रजिस्टर डुप्लीकेट (दो प्रतियों में) संधारित किया जाएगा। यह रजिस्टर बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय से उपलब्ध कराया जाएगा। एकल मासिक रजिस्टर व आरआरएस-एमपीआर की सभी प्रविष्ठियां माह के अंतिम कार्य दिवस को तैयार होने वाली एमपीआर से केन्द्रवार मिलान कर केस मोबाइल एप से फीड की जाएगी। विभाग की ओर से केस मोबाइल एप तैयार करने के बाद उस पर काम करने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को 12-12 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया था। हालांकि बीकानेर जिले में अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इस प्रशिक्षण से अनभिज्ञ है।
काम के साथ मिलेंगे दाम
जानकारी के अनुसार एप पर कार्य कराने के लिए विभाग की ओर से प्रत्येक कार्यकर्ता को मोबाइल रिचार्ज के लिए दो सौ रुपए का भुगतान किया जाएगा। वहीं मोबाइल एप पर सभी सेवाओं में 60 फीसदी से अधिक व 21 दिनों से अधिक कार्य करने पर कार्यकर्ता को पांच सौ रुपए तथा सहायिका को ढाई सौ रुपए का प्रतिमाह इंसेंटिव दिया जाएगा।
पूर्व-प्राइमरी शिक्षा गौण
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर पढऩे वाले बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग व शिक्षा विभाग ने तीन साल पहले अनुबंध किया था। इसकी क्रियान्विति के लिए पीईईओ को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वे एक शिक्षक को प्रभारी के रूप में आंगनबाड़ी केन्द्रों पर भेजकर अध्यापन करवाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। गंभीर बात यह है कि हजारों उच्च माध्यमिक व माध्यमिक विद्यालयों में आंगनबाड़ी केन्द्रों का समन्वय हो चुका है लेकिन उनमें भी पूर्व प्राथमिक शिक्षा केवल कागजों तक ही सिमटी हुई है।