प्रदेश के बीस फीसदी सरकारी स्कूल ‘फाइव स्टार’

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अस्सी फीसदी स्कूलों में नहीं आधारभूत सुविधाएं
बीकानेर। सरकारी स्कूलों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ संसाधनयुक्त करने के सरकारी दावे कागजी साबित हो रहे हैं। प्रदेश में १४ हजार से अधिक माध्यमिक शिक्षा स्कूल हैं, जिनमें से महज २५७५ स्कूलों में ही आधारभूत सुविधाएं मौजूद है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा इन स्कूलों को फाइव स्टार रैंकिंग दी गई है। हालांकि रैंकिंग कार्य प्रतिमाह किए जाने का प्रावधान है परन्तु रमसा व एसएसए के समन्वय के बाद रैंकिंग का कार्य लगभग बंद पड़ा है। विगत कई महीनों से स्कूलों की नई रैंकिंग जारी नहीं हुई है। हालांकि स्कूल शिक्षा परिषद ने जिला कार्यालयों को आदेश जारी कर अधीनस्थ संस्था प्रधानों को पोर्टल पर समस्त जानकारियां ऑनलाइन करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है रैंकिंग के मायने
सरकारी स्कूलों में पहली से बारहवीं तक की कक्षाओं के लिए पृथक कक्षा-कक्ष, कार्यालय, पुस्तकालय, स्टोर, बालक-बालिकाओं के लिए पृथक-पृथक शौचालय, पेयजल स्टोरेज व शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, पोषाहार के लिए पृथक व साफ-सुधरा रसोईघर, शौचालय की सफाई, विद्यालय परिसर की सफाई, दीवारों पर चित्रकारी, रंगरोगन के साथ पर्याप्त नामांकन व स्टाफ वाले स्कूलों को फाइव स्टार रैंकिंग दी जाती है।
चालीस फीसदी स्कूल फोर स्टार
प्रदेश में पांच हजार से अधिक स्कूलों में अधिकांश सुविधाएं मौजूद है लेकिन कहीं स्टाफ कम है, तो कहीं नामांकन कमजोर है। कुछ स्कूलों में कक्षा-कक्ष की कमी होने के कारण इन स्कूलों को फोर स्टार रैंकिंग दी गई है। करीब छह हजार स्कूलें थ्री स्टार रैंकिंग वाली भी है, जिनमें शुद्ध पेजयल की व्यवस्था नहीं है और कइयों में कमरों में पंखे लगे नहीं होने के कारण इनकी रैकिंग कम रही है।
दस फीसदी ही एक स्टार
प्रदेश में बहुत कम स्कूल ही एक स्टार रैकिंग पर है। इन स्कूलों को हाल ही में क्रमोन्नत किया गया था। इसके चलते कक्षा कक्ष, स्टाफ, नामांकन आदि कम होने के साथ ही माध्यमिक स्कूल जैसी आधारभूत सुविधाएं मौजूद है। इस कारण रैकिंग एक स्टार ही रह गई है।
परिणाम पर भी रैकिंग का असर
यदि विद्यालय फाइव स्टार है और बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम अच्छा नहीं रहा है, तो स्कूल की रैकिंग में गिरावट आ सकती है। २५७५ स्कूलों में से करीब पचास ऐेसे स्कूल हैं जिनका बोर्ड परीक्षा परिणाम काफी कम रहा है। हालांकि वर्तमान में रैकिंग व्यवस्था बंद पड़ी है। रैकिंग पुन: शुरू होने पर ये पचास स्कूल फोर स्टार रैकिंग में आ जाएंगे।