बीकानेर – 18 सितम्बर को किसके नाम निकलेगी महापौर की लॉटरी?

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* 18 सितम्बर को
निकलेगी महापौर
के लिए लॉटरी
* महिला वर्ग में
दावेदारों की कमी
है दोनों पार्टियों के
पास

डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

निकाय चुनावों को लेकर रणभेरी बज चुकी है और कांग्रेस और भाजपा अपने अपने स्तर पर तैयारियों में जुट गई है। जहां सगंठनात्मक रूप से दोनों पार्टियां अपने अपने स्तर पर जुटी हुई है वहीं संभावित दावेदार भी अंदरखाने में तैयारी में जुट गए हैं हालांकि वे अब १८ सितंबर को पार्षदों के लिए सीट आरक्षित होगी जबकि महापौर का मामला अक्टूबर के पहले सप्ताह में साफ होगा। बीकानेर में भी दावेदारों ने अपनी दौड़धूप तेज कर दी है लेकिन अब सबकी निगाहें लॉटरी पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में संभावित दावेदार खुद को प्रत्याशी मान रहे हैं लेकिन लॉटरी अपने वर्ग में होने की बात कहते हैं।

इनकी सिफारिश पर मिलेगा टिकट

हालांकि दोनों ही दलों में संभावित जिताऊ प्रत्याशियों को लेकर पार्टियां लॉटरी से पहले एकबारगी स्क्रूटनी का काम कर चुकी है लेकिन फौरी तौर पर हुए काम के बाद अब लॉटरी के बाद ही असली स्क्रूटनिंग शुरू होगी। भाजपा में जहां टिकट वितरण में केंद्रीय राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल का पूरा हस्तक्षेप होगा वहीं कांग्रेस में ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला की अनुशंसा पर ही टिकट मिलेगी इस बात में कोई संशय नहीं है।

भाटी की भूमिका पर नजर

उधर, भाजपा छोड़ चुके पूर्व मंत्री देवीसिंह भाटी की भूमिका भी निकाय चुनाव में महत्वपूर्ण रहने वाली है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से भाटी फिर से भाजपा नेताओं के संपर्क में नजर आए हैं, लेकिन स्पष्ट तौर पर पार्टी सदस्य नहीं बने। यह तय है कि वो अपने स्तर पर महापौर के लिए किसी प्रत्याशी को आगे जरूर करेंगे। अगर उनके मन मुताबिक व्यक्ति को भाजपा से टिकट मिल गया तो समर्थन भी दे सकते हैं। हालांकि यह भी तय है कि भाटी विरोधी गुट भी अब पूरी तरह प्रभाव में है। केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ऐसे किसी व्यक्ति का समर्थन नहीं करेंगे जो भाटी गुट से होगा। लोकसभा चुनाव में भाटी ने अर्जुनराम का जमकर विरोध किया है।

बढ़ गई सक्रियता

निकाय चुनावों में दावेदारों की सक्रियता भी पार्टी के बड़े नेताओं के साथ दिखने और उनके दौरों के दौरान बढ़ गई है। कल तक इन बड़े नेताओं से दूरी बनाने वाले भी अब हर समय इन नेताओं के साथ ना सिर्फ बीकानेर बल्कि अन्य जिलों के दौरों में भी दिख रहे हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि टिकट की दौड़ में ये नेता पिछडऩा नहीं चाहते हैं।
हालांकि धरातल पर बिना किसी मजबूत बैकग्राऊंड वाले कई नेता भी खुद को दावेदार बता रहे हैं जो विधायक के चुनाव में भी खुद को दावेदार बता रहे थे लेकिन महापौर में दावेदारी जताकर संगठन में किसी पद पद पाने की जदोजह्द में लगे हुए हैं और हालांकि अंदरखाने में उनको भी पता है कि वे पूरी तरह से महापौर के टिकट को लेकर साइड लाइन हो चुके हैं।
सामान्य वर्ग-भाजपा और कांग्रेस दोनों में ही इस वर्ग में संभावित दावेदारों में बड़ा घमासान देखने को मिल सकता है वहीं पार्टियों के लिए भी नाम तय करना बड़ा चुनौतीपूर्ण होगा। कांग्रेस में जहां बाबू जयशंकर जोशी और वल्लभ कोचर का नाम चर्चा में है वहीं शहर कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्रीलाल व्यास का नाम भी चर्चा में शुमार है। वहीं भाजपा में मोहन सुराणा, सोहनलाल बैद, गुमानसिंह राजपुरोहित संभावित की दौड़ में है। शहर अध्यक्ष सत्यप्रकाश आचार्य, पूर्व अध्यक्ष विजय आचार्य के नाम को लेकर भी चर्चाएं तेज है।
ओबीसी वर्ग-दोनों ही दलों में इस वर्ग में भी कई नाम है। कांग्रेस में इस वर्ग में लिस्ट लंबी है। हालांकि दो बार विधायकी के साथ ही एक बार महापौर के सीधे चुनाव में हार चुके गोपाल गहलोत के नाम को उनसे जुड़ा खेमा फिर आगे बढ़ा रहा है लेकिन बताया जा रहा है कि गहलोत किसी भी चुनाव लडऩे के मूड में नहीं है। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत, गुलाब गहलोत को दावेदार माना जा रहा है। वहीं भाजपा में केंद्रीय राज्यमंत्री के प्रवक्ता अशोक भाटी और शहर भाजपा उपाध्यक्ष अशोक बोबरवाल के नाम को लेकर भी पार्टी में चर्चाएं है।
महिला वर्ग-महिला सीट होने पर दोनों ही दलों में चर्चित नाम को लेकर संभावनाएं कम है क्योंकि दोनों ही दलों में इक्का दुक्का नाम को छोड़ दें तो सशक्त महिला लीडरशिप तैयार हुई हो ऐसा देखने में नहीं आ रहा है। ऐसे में इस बात की भी संभावनाएं जताई जा रही है कि जो दावेदार अपनी तैयारी कर रहे हैं वो अपने घर से ही किसी महिला के नाम को आगे कर सकते हैं। इसके अलावा अजा वर्ग के नामों को लेकर भी पार्टी के भीतर मंथन चल रहा है लेकिन फिलहाल नजरें लॉटरी पर टिकी है।