निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक नियुक्तियों की कवायद

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बीकानेर। नवंबर में प्रदेश में होने वाले निकाय चुनाव से पहले राजनीतिक नियुक्तियों की पहली सूची जारी हो सकती है। दरअसल जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में जोश भरने और पार्टी के प्रदर्शन को सुधारने को लेकर प्रदेश स्तर पर इसको लेकर मंथन शुरू हो गया है। पिछले दिनों इसको लेकर प्रदेश स्तर पर जिले के नेताओं से इसको लेकर एक सूची भी मांगी गई थी। इस सूची में विभिन्न कमेटियों में सदस्यों को नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ताओं ने भी अपनी भागदौड़ शुरू कर दी है। दरअसल विधानसभा चुनावों के बाद हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन और इसके बाद कश्मीर में धारा ३७० हटाने के बाद भाजपा के पक्ष में बन रहे माहौल के चलते कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में सरकार के कामकाज को लेकर आमजन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं को मोटीवेट करने के लिए यह कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है।

धरातल के कार्यकर्ताओं को खुश करने की काम
दरअसल पार्टी आलाकमान को पता है कि धरातल पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं तक इस बात का संदेश जरूरी है कि प्रदेश में पार्टी की सरकार बनने के बाद उनकी भूमिका को महत्व दिया जा रहा है ताकि आने वाले निकाय और पंचायतराज के चुनावों में कार्यकर्ताओं दुगने जोश से पार्टी के लिए काम कर सके। इसलिए बड़े नेताओं से उन नामों की सूची मांगी गई है जो ग्रास रूट लेवल पर पार्टी के लिए काम रहे हैं।

पहले साल में ही शुरू हो गई नियुक्तियां
पिछले सालों के मुकाबले इस बार नई सरकार के बनने के बाद राजनीतिक नियुक्तियों को दौर जल्द ही शुरू हो गया। प्रदेश में वक्फ बोर्ड, बाल सरंक्षण आयोग के साथ ही सहायक लोक अभियोजक के रूप में कांग्रेसी विचारधारा वाले लोगों को नियुक्ति इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

टिकट वितरण का अंसतोष दूर करने की कवायद
दरअसल पार्टी स्तर पर इस बात को लेकर भी चर्चा हुई है कि निकाय और पंचायत राज के चुनावों में हर किसी को टिकट मिलना संभव नहीं है। ऐसे में टिकट वितरण के अंसतोष पनपने से विपरीत माहौल के पहले ही कार्यकर्ताओं को संतुष्ट किया जा सके।