बीकानेर – ‘आदर्श’ व ‘उत्कृष्ट’ नहीं रहेंगे सरकारी स्कूल

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डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

प्रदेश में करीब पन्द्रह हजार राजकीय उच्च माध्यमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के नाम के साथ लिखे आदर्श व उत्कृष्ट शब्द हटेंगे। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के राज्य परियोजना समन्वयक ने गुरुवार को इस आशय के आदेश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा एवं भाषा विभाग ने आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय लिखने को गलत रीति मानते हुए परिषद को हटाने के निर्देश दिए थे, जिसकी क्रियान्विति में यह आदेश जारी किए गए हैं। अब राजकीय आदर्श अथवा राजकीय उत्कृष्ट विद्यालय के स्थान पर राज्य की आदर्श/उत्कृष्ट विद्यालय योजना अंतर्गत चयनित शब्द का प्रयोग किया जाएगा।
राज्य निदेशक ने दिया स्पष्टीकरण
स्कूल के नाम के साथ आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय शब्द हटाने के आदेश जारी करने के साथ ही राज्य निदेशक ने स्पष्टीकरण भी दिया है। उनका कहना है कि इन विद्यालयों का राज्य की आदर्श अथवा उत्कृष्ट विद्यालय योजना अंतर्गत चयन किया गया है। न की इन्हें आदर्श व उत्कृष्ट नाम दिया गया है।
लेटर हैड व मुहर बदलेगी
प्रदेश में करीब पन्द्रह हजार राजकीय आदर्श व राजकीय उत्कृष्ट विद्यालयों के लेटर हैड व मुहर को बदला जाएगा। संबंधित संस्था प्रधानों ने स्कूल के नाम के साथ आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय अंकित करवा लिया था, जिसे राज्य निदेशक ने गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभाव से हटाते हुए नई मुहर व लेटर हैड तैयार करवाने के निर्देश दिए हैं।
रमसा ने दिया था आदेश
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद से पूर्व संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) ने संस्था प्रधानों को आदेश जारी कर स्कूल के नाम के साथ आदर्श व उत्कृष्ट शब्द लिखवाने के आदेश दिए थे। इतना ही नहीं राज्य स्तर पर आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय का लोगो भी तैयार करवाया गया, जिसे संबंधित विद्यालयों को स्कूल के मुख्य द्वार पर अंकित करवाना था। अधिकांश संस्था प्रधानों ने इसकी क्रियान्विति कर ली। अब मुख्य द्वार पर लिखा आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय का नाम भी हटेगा।
अब नहीं चलेगा नाम
स्कूल शिक्षा परिषद के राज्य परियोजना निदेशक ने संस्था प्रधानों को आगामी पत्राचार के दौरान आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालय के नाम का उल्लेख नहीं करने के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि आदर्श व उत्कृष्ट योजना है न कि विद्यालय का नामकरण है।
नाम में क्या रखा है
प्रदेश में वर्तमान में ५७८७ आदर्श विद्यालय व ८८३९ उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हो रहे हैं। गत सरकार ने आदर्श व उत्कृष्ट योजना के तहत इन स्कूलों में प्राथमिकता के आधार पर संसाधन मुहैया करवाए, वहीं रिक्त पदों को भी प्राथमिकता से भरा गया। अधिकांश आदर्श विद्यालय वर्तमान में साधन-सम्पन्न है। गत बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी आदर्श व उत्कृष्ट विद्यालयों ने श्रेष्ठता साबित की है। अब नाम बदलने को लेकर चर्चाएं होने लगी है। शिक्षकों का कहना है कि आदर्श व उत्कृष्ट का नाम जुडऩे से स्कूलों का विकास होता है, तो फिर नाम क्यों बदला जा रहा है।