बीकानेर – किस नेता की चली, किसकी नहीं, कौन राजी, कौन बेराजी

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श्याम एन रंगा. बीकानेर

नगर निगम के चुनावों की रौनक धीरे धीरे दिखने लगी है। नामांकन भरने के आखिरी दिन के बाद एक तरफ जहां प्रत्याशियों ने मतदाताओं से सम्पर्क करना शुरू कर दिया है वहीं दूसरी तरफ शहर के चौक, पाटों, पान की दुकान, नुक्कड़ पर जातिगत समीकरणों, व्यक्तिगत व्यवहार, पार्टी सहित अन्य मुद्दों पर चर्चाएं होने लगी है।
किस वार्ड में किस नेता का टिकट
किस वार्ड में किस नेता की चली और किस नेता की नहीं चली, इस बात को अपने अपने हिसाब से आंका जा रहा है। कांग्रेस की गुटबाजी की चर्चा के साथ बीजेपी में एक नेता की टिकट बंटवारें में चलने की चर्चा आम जनता में जोरों पर है। आम वोटर यह भी अनुमान लगा रहा है कि कांग्रेस में कल्ला गुट के कितने टिकट बांटे गए हैं और झंवर सहित यशपाल गहलोत और अन्य नेताओं के कितने लोगों को टिकट मिला है।

जोशी के परिजन को नहीं मिला टिकट

बीजेपी में एक पूर्व विधायक के किसी भी निकटतम व्यक्ति को टिकट नहीं मिलने की स्थिति पर सबको आश्चर्य हो रहा है। पूर्व विधायक जोशी के भतीजे कुंजबिहारी जोशी ने वार्ड 58 में अपना प्रचार भी शुरू कर दिया था और उनका टिकट पक्का माना जा रहा था लेकिन इस वार्ड में मदनगोपाल पुरोाहित को टिकट मिलने से सभी चकित हैं।

हॉट शीट हो रहा है वार्ड 79

दूसरी तरफ वार्ड 79 में हर्षवद्र्धन जोशी और रमजान कच्छावा के टिकट के लिए हुए घमासान पर भी चर्चा का बाजार गर्म है। दरअसल, पिछले चुनाव में भी ऐसे हालात बने थे लेेकिन तब हर्षवद्र्धन को रोक लिया गया, इस बार दोनों पक्ष अड़े रहे और हर्षवद्र्धन टिकट लेने में सफल हो गए।

वार्ड ४४ में नरेश जोशी का सस्पेंस

बीजेपी ने वार्ड 44 में नरेश जोशी के टिकट लौटाने और उस स्थान पर विजयसिंह राजपूत को टिकट मिलने की घटना मतदाताओं की समझ से बाहर है। नरेश जोशी ने भी फेसबुक पर विजय का समर्थन कर दिया। इस टिकट परिवर्तन के बाद यहां पार्टी के कार्यकर्ता ही नाराज हो रहे हैं। बताया जाता है कि राजनीति के बड़े दायरे में सोचते हुए यह टिकट विजय सिंह को दिया गया है।

इनके टिकट कटने का आश्चर्य
इसी तरह कांग्रेस कार्यकर्ता सुभाष स्वामी की मां का टिकट कटने का हर किसी को आश्चर्य है। विधानसभा चुनाव में जी जान से मेहनत करने वाले सुभाष स्वामी ने अब कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी तरह फिरोज भाटी सहित कईं सक्रिय कार्यकर्ताओं का टिकट कटने का आश्चर्य है। वहीं कुछ वार्डों में अनजान लोगों को टिकट दिया गया है।

किसको कितना मिला महत्व?

लोग यह भी बातें कर रहे हैं कि किस जाती को कितना महत्व मिला है। 80 वार्ड में ब्राह्मण, मुसलमान, ओबीसी, एससी सहित अन्य जातीगत समीकरणों के प्रत्याशियों पर भी चर्चा की जा रही है, किस पार्टी ने किस जाती के ज्यादा और कम प्रत्याषी उतारेे है इस पर भी मतदाजाओं की नजर है।

मुद्दों पर नहीं है बात

लोकतंत्र के इस पर्व में जहां स्थानीय मुद्दों पर बात होनी चाहिए वहां जाति व नेताओं की गुटबाजी पर हो रही चर्चाएं चिंताजनक है। मतदाता पारखी है, लोक के इस तंत्र का निर्माण कर्ता आम मतदाता यह जानता है कि नगर निगम में मुद्दे क्या है और क्या होने चाहिए लेकिन जाती के प्रति प्रेम व अपने अपने नेता के प्रति लगाव कहीं न कहीं मतदाता की इस जानकारी को दबाने का काम कर रहे हैं।

उम्मीद है शहर का मतदाता अपनी चर्चाओं में सफाई, नाली, सडक, रोड लाईट सहित स्थानीय मुद्दों को भी तरजीह देगा।

एक-एक बात याद आती है

इस चुनाव में प्रत्याशी जहां दिनरात घूमकर वोट मांग रहे हैं, वहीं मतदाता एक-एक दिन का हिसाब करने में जुटा हुआ है। प्रत्याशी या फिर परिवार से किसी भी व्यक्ति ने कोई सहयोग किया है तो उसे याद किया जा रहा है, जिसने विरोध किया तो उसे भी दर्ज कराया जा रहा है। सारा हिसाब किताब इस चुनाव में करने की चेतावनी भी प्रत्याशियों को मिल रही है।