बीकानेर – अब स्कूलों में अधिकारियों की उपस्थिति में तुलेगा पोषाहार

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डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

स्कूलों में पोषाहार के लिए उपलब्ध होने वाला खाद्यान्न की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता की याद अब प्रशासन को आई है। इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वालों पर गाज गिर सकती है। जितना खाद्यान्न स्कूलों के लिए आवंटित होता है वह अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में तुलवा कर रखा जाएगा। आमतौर पर निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान स्कूलों में पहुंचने की शिकायतें रहती है लेकिन खाद्यान खाली करने के दौरान इसकी मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है। क्रय-विक्रय सहकारी समिति के माध्यम से स्कूल में पहुंचने वाले खाद्यान का वजन शिक्षा विभाग के एक अधिकारी, स्कूल के अध्यापक की उपस्थिति में किया जाएगा। उसके बाद ही खाद्यान स्कूल में रखा जाएगा।

बिना इजाजत नहीं भेज सकेंगे खाद्यान

अब क्रय विक्रय सहकारी समिति के ठेकेदार बिना अधिकारियों की उपस्थिति में खाद्यान्न स्कूल में नहीं भेज सकेंगे। जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर पूर्व में कई बार शिकायतें जिला प्रशासन को भी मिल चुकी है।

कहीं मिलावटी दूध तो नहीं

जिले में मिलावटी मावे व दूध की शिकायतों के बाद प्रशासन ने भी स्कूलों में अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत वितरित किए जाने वाले दूध की गुणवत्ता जांचने का मानस बनाया है। हालांकि इसकी वास्वविक जांच तो सीएमएचओ द्वारा निर्धारित टीम ही कर सकती है। स्कूलों में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए लेक्टोमीटर से केवल दूध का फेट पता चलता है। दूध केमिकलयुक्त है या सही है। इसका पता विस्तृत जांच करने पर ही लग सकता है। दूध की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी को भी निर्देशित किया कि वह सभी ब्लॉक में कार्यरत ब्लॉक सीएमओ के माध्यम से प्रतिदिन उपखंड मुख्यालय की 4 और ग्रामीण क्षेत्रों की 4 विद्यालयों के सैंपल विभिन्न स्कूलों से प्राप्त कर दूध की गुणवत्ता की जांच करवाएं और जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध करवाई जाए। राज्य सरकार उच्च गुणवत्ता युक्त दूध बच्चों को मुहैया करवा कर उनके स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार चाहती है। ऐसे में सरकार की मंशा अनुसार पौष्टिक दूध बच्चों को मिले। इसके लिए दूध की जांच जरूरी है।