शहर में प्रमाणित, गांवों में सस्ता दूध पीने को मजबूर नौनिहाल

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डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

‘सेहत का गिलास, हर बच्चे के हाथÓ के स्लोगन के साथ प्रदेश में दो साल पहले शुरू हुई अन्नपूर्णा दूध योजना प्रमाणिकता का इंतजार कर रही है। योजना के तहत शहरी क्षेत्र के स्कूलों में सरस डेयरी के माध्यम से दूध की खरीद के आदेश दिए गए, जिसके लिए प्रति लीटर ४२ रुपए देय है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ३५ रुपए प्रति लीटर दूध की खरीद की बाध्यता होने के कारण डेयरी का प्रमाणित दूध नहीं खरीदा जा रहा है। इसके चलते संस्था प्रधानों के सामने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता देखने को मिल रही है, क्योंकि कई बार दूध पीने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ जाती है, जिससे बाद संस्था प्रधानों के भी हाथ-पांव फूल जाते हैं। हालांकि तबीयत अन्य कारण से भी बिगड़ सकती है लेकिन कार्रवाई के डर से संस्था प्रधान चिंतित है। वहीं भावों में विरोधाभास के साथ समय पर भुगतान नहीं मिलने से स्कूलों में इसके संचालन को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। गत दिनों शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा के समक्ष संस्था प्रधानों ने अन्नपूर्णा दूध योजना का समय पर भुगतान नहीं मिलने की समस्या उठाई थी। मंत्री ने भी योजना को लेकर राज्य स्तरीय समीक्षा की आवश्यकता जताई और बकाया भुगतान शीघ्र करवाने का भरोसा भी दिलाया था लेकिन एक सप्ताह बाद भी भुगतान नहीं हुआ है।