पंचायती राज में जनप्रतिनिधियों का दखल बंद

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डीएनआर रिपोर्टर. बीकानेर

पंचायती राज चुनाव की घोषणा के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। इसी के साथ अब पंचायती राज में जनप्रतिनिधियों की दखलदांजी बंद हो गई तथा पंचायती राज के अन्तर्गत होने वाले सभी कार्यों की बागडोर प्रशासन के हाथों में आ गई है। पंचायती राज में जनप्रतिनिधियों की दखलदांजी के चलते ग्रामीण विकास के कार्य रेंग-रेंग कर हो रहे थे। जनप्रतिनिधि होने वाले वाल े कार्यों को राजनीति दृष्टि से देख रहे थे। जिसके कारण पंचायती राज की कई योजनाओं के कार्यों की गति तो बढ़ ही नहीं पा रही थी। यही नहीं पंचायती राज में विभिन्न मिशनों, आयोगों से मिलने वाली राशि का उपयोग भी पसंदीदा व राजनीतिक परिलाभ वाले क्षेत्र में हो रहा था। गौरतलब है कि पंचायती राज में तीन चरणों में 17, 22, 19 जनवरी को चुनाव होने जा रहे है। जहां एक ओर पंचायती राज में जनप्रतिनिधियों की दखलदांजाी बंद हो गई है। वही दूसरी ओर से इन चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई है।

ठहराव की स्थिति
पंचायती राज चुनाव की घोषणा से एक बार पंचायती राज में विभिन्न योजनाओं में होने वाले कार्यों को लेकर एकबारगी ठहराव की स्थिति आ गई है। क्षेत्र के प्रतिनिधि आचार संहिता के चलते कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते तथा अधिकारियों को किसी की परवाह तक नहीं है। जिसका उदाहरण आए दिन जिला स्तरीय बैठकों में देखने को मिलता है। उसका नुकसान जरुर ग्रामीण क्षेत्र में अंतिम पंक्ति में बैठे लोगों को उठाना पड़ रहा है।

7 फरवरी 2020 को कार्यकाल पूरा

पांच साल पहले बीकानेर जिला प्रमुख के पद पर 7 फरवरी को सुशीला सींवर आसीन हुई थी। ऐसे में मानकर चल रहे है कि इस बार भी सात फरवरी तक बीकानेर को नया जिला प्रमुख मिल जाएगा। गौरतलब है कि इस बार बीकानेर जिला प्रमुख का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।