चिंतन : 2020 में बीकानेर के लिए करें संकल्प

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नववर्ष का ‘बीकानेरी संकल्प’
वर्ष २०२० की सभी को शुभकामनाएं। वर्ष २०१९ में हम जो काम नहीं कर सके, उस काम के लिए २०२० ही शायद उपयुक्त है। इस साल तो हम शहर की उन समस्याओं का निराकरण कर ही लेंगे जो पिछले साल नहीं कर सकेंगे। महज ३६५ दिन का यह पैकेज भी खत्म हो जाएगा और बीकानेर के लोग इसी तरह रेलवे क्रासिंग के नीचे से होकर गुजरते रहेंगे, टूटी सडक़ के किनारे से निकलेंगे, सूरसागर के नूर पर अफसोस करते हुए आगे बढ़ेंगे, पीबीएम अस्पताल की गंदगी के लिए चिकित्सकों को दोषी ठहराएंगे और खुद मौका मिलते ही अस्पताल के किसी किनारे पर ‘हल्का’ हो आएंगे, गंदे पानी की सब्जी खाते रहेंगे, बंद रोड लाइट्स की चिंता किए बगैर चैन की नींद सोएंगे, बिगड़े यातायात पर सिर्फ मंत्री-संतरी को कोसेंगे, अतिक्रमण को ऐसे ही बढ़ावा देंगे, कचौरी समोसे की दुकान के नाम पर संकड़े हुए बड़े मोहल्लों को निहारते रहेंगे, आवारा पशुओं को धर्मांधता के नाम पर शहर की सडक़ों पर पालते रहेंगे। दरअसल, हम बीकानेरवासी बहुत संतोषी जीव है। हमें किसी समस्या से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है। हम समस्या पर चर्चा करते हैं, चिंतन करते हैं लेकिन उस पर ‘एक्शन’ नहीं होता। हम नेताओं को कोसने में भी कोई कमी नहीं रखते, चुनाव आने पर उसे सबक भी देते हैं लेकिन अपने स्तर पर कोई ठोस प्रयास नहीं करते। हमें यह प्रण लेना ही चाहिए कि एक बड़ी समस्या का निराकरण करने के लिए पूरा बीकानेर एक होगा। वह समस्या रेलवे फाटक की हो सकती है, पीबीएम अस्पताल की गंदगी हो सकती है, जगह-जगह हुए अतिक्रमण हो सकती है। हम देश के बड़े शहरों की बात न करें, प्रदेश के ही कुछ जिलों का उदाहरण लिया जा सकता है, जहां जन समस्याओं के प्रति पूरे शहर का एक नजरिया होता है, एक प्रयास होता है। राजनेता हो या फिर सामान्य नागरिक, सभी मिलकर उसे दूर करने की कोशिश करते हैं। एक दिन उस समस्या का निस्तारण हो जाता है। हमारे यहां भी सूरसागर की समस्या का निराकरण हम सभी के प्रयासों का नतीजा है। रेलवे क्रासिंग की समस्या पर हम एक राय नहीं है, अलग-अलग विचार हैं। इस साल यह तो तय कर ही लेना चाहिए कि एलिवेटेड रोड बननी चाहिए, अंडर ग्राउंड रास्ता बनना चाहिए, बाइपास बनना चाहिए या फिर रेलवे स्टेशन के आसपास ही एक और ओवरब्रिज बनना चाहिए। हमारा इतिहास करीब साढ़े पांच सौ साल का है, इतने सालों में शहर की तस्वीर बदल गई, अगले कुछ सालों में और बदलनी चाहिए। जो शहर साढ़े पांच सौ सालों के है,उनके आगे हमारा विकास नगण्य है। हमें न तो दिल्ली बनना है और न ही मुम्बई। हम सिर्फ और सिर्फ बीकानेर बना रहना चाहते हैं। हमारी संस्कृति बनी रहनी  चाहिए। हमारे पुरखे जो दे गए हैं, उसे संभालकर रख लें और अपनी पीढिय़ों के लिए कुछ अच्छा कर जाए। कम से कम मैं तो आने वाले पीढ़ी को रेलवे क्रासिंग जैसी समस्या से, गंदगी से लबरेज पीबीएम अस्पताल नहीं देना चाहता। अगर आप भी नहीं चाहते हैं तो शहर की समस्याओं के प्रति अपने  नजरिये को स्पष्ट करें। कुछ न कर सकें तो एक पत्र जिला कलक्टर को तो दे ही सकते हैं। उन्हें बतावें कि आप किस समस्या से त्रस्त हैं और उसका समाधान आप क्या चाहते हैं। हो सकता है कि आपके पत्रों के माध्यम से प्रशासन का व सरकार का भी नजरिया तय हो। जो छोटी-छोटी समस्याएं हैं, उनके प्रति स्वयं विचारवान बनें,  भगीरथ बनें। घर के आगे गड्ढा है तो खुद ही मिट्टी डाल दें, प्रशासन का इंतजार न करें। अभी एक चिकित्सक ने मुझे फोन करके कहा कि मैं बीकानेर की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हूं। चाहता हूं कि इनका निराकरण हो। जरूरी हुआ तो अपनी तरफ से कुछ अंशदान भी कर सकता हूं। सभी बीकानेरवाले मिलकर क्यों न अपने शहर के लिए एक बैंक खाता खोल दें, उसमें इच्छानुसार रुपए दें ताकि शहर के विकास में धन की कमी न आवें। पीबीएम अस्पताल का एक बैंक खाता खोल दिया जाए तो उपचार प्राप्त करने के बाद मरीज का परिजन अपनी इच्छा से ऑनलाइन भुगतान कर दें। यह बातें छोटी छोटी है लेकिन बड़ी है। ३६५ दिन के वर्ष २०२० में कुछ न कुछ शहर के लिए करने का संकल्प लें। खुद के लिए तो हमेशा ही करते हैं, कुछ शहर के लिए भी करें। और कुछ नहीं तो ‘ऑवर फॉर नेशन’ और ‘स्वच्छता प्रहरी’ जैसे अभियानों से जुडक़र ही सहयोग करें ताकि आप आने वाली पीढ़ी के लिए अच्छे बीकानेरी होने का सबूत तो दे सकें।
आपका साल मंगलमयी हो, हमारा शहर सुंदर, स्वच्छ और स्वस्थ हो।