तीसरे मोर्चे के लिए जगह नहीं है बीकानेर में

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डीएनआर रिपोर्टर.बीकानेर
लोकसभा और विधानसभा चुनाव के परिणामों में बड़ा अंतर होता है। विधानसभा में जिस पार्टी का प्रत्याशी जीतता है, लोकसभा में उसी दल को प्रतिद्वंद्वी से कम वोट मिलते हैं। यही कारण है कि बीकानेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आने वाली विधानसभाओं के परिणाम हर बार अलग होते हैँ। बीकानेर में तीसरे मोर्चे के दलों ने विधानसभा में जो प्रदर्शन किया था, वो इतना लचर था कि लोकसभा में उनका वजूद ही नजर नहीं आ रहा है।
बीकानेर लोकसभा में आठ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें से सात बीकानेर जिले के और एक श्रीगंगानगर का अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र है। बीकानेर की सातों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस और भाजपा के अलावा जिन दलों ने भाग्य आजमाया है, वो कुछ हजार वोटों से आगे नहीं बढ़ सके। बहुजन समाज पार्टी जैसी बड़ी पार्टी जिले में दस हजार वोट भी नहीं ले सकी। वहीं आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन नगण्य रहा। कई जगह तो आम आदमी पार्टी से ज्यादा वोट निर्दलीय उम्मीदवारों ने लिए हैं। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रत्याशी ने खाजूवाला में छोड़ किसी भी हिस्से में दमखम नहीं दिखाया। इसी तरह शिव सेना जैसी पार्टी का भी वजूद नजर नहीं आया। जमीदारां पार्टी भी उपस्थिति दर्ज कराने में नाकाम रही।
नहीं दिखा हाथी का दमखम
बहुजन समाज पार्टी ने बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में रफीक शाह को टिकट दिया था, जिन्होंने महज १६१७ मत हासिल किए। इसी तरह बीकानेर पश्चिम में नारायण हरी प्रत्याशी थे, जिन्हें १४६२ वोट मिले। लूणकरनसर में पवन कुमार ओझा ने २७२० मत हासिल किए। खाजूवाला में गोवर्धनराम को १९४५ वोट मिले। श्रीकोलायत में रघुनाथ राम को बसपा के बैनर पर १३५० वोट मिले। सभी विधानसभा में महज नौ हजार के आसपास वोट लाने वाली इस पार्टी ने लोकसभा में भैराराम को प्रत्याशी बनाया है। देखना होगा कि नए प्रत्याशी लोकसभा में क्या कमाल कर पाते हैं।
कहां हैं ‘आपÓ ?
आम आदमी पार्टी ने बीकानेर शहर की दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे लेकिन पांच सौ पांच वोटों में दोनों प्रत्याशी सिमट गए। ऐसे में लोकसभा चुनाव में इस पार्टी ने अब तक किसी को प्रत्याशी नहीं बनाया है।
शिव सेना भी नगण्य?
बीकानेर में शिव सेना का भी वजूद नजर नहीं आया। बीकानेर पूर्व और पश्चिम में इस हिन्दूवादी दल ने ४१२ वोट हासिल किए। जिसमें बीकानेर पूर्व में महज १०६ मत मिले। ऐसे में लोकसभा में यह दल भी दौड़ से बाहर नजर आ रहा है।
यह दल भी सस्ते में निपट गए
कई नए दल भी बहुत ज्यादा असर नहीं छोड़ पाए। हालांकि इनमें से कुछ विधानसभा चुनाव खत्म होने के साथ ही अगली बारी की तैयारी में लग चुके हैं। खासकर अभिनव राजस्थान पार्टी ने काम तेज कर दिया। विधानसभ चुनाव में इस दल ने भी कुछ हजार वोट ही हासिल किए। भारतीय पंचायत पार्टी, बहुजन मुक्ति पार्टी, दलित क्रांति पार्टी, अनारक्षित समाज पार्टी, जमीदारां पार्टी, असंख्य समाज पार्टी तो अब नजर ही नहीं आ रही है।
नोटा ने तोड़ा छोटे दलों का रिकार्ड
बीकानेर की सातों विधानसभा सीटों पर नोटा ने अच्छा खासा दम दिखाया है। नोटा के १७ हजार २६४ वोट पड़े हैं। इस बार लोकसभा चुनाव में भी नोटा का असर नजर आएगा। किसी भी अन्य दल को सातों विधानसभा सीटों में इतने वोट नहीं मिले हैं। लोकसभा चुनाव में यह संख्या और भी बड़ी हो सकती है।