पंचायत प्रसार अधिकारी कर रहे है ‘बाबूगिरी’

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वर्ष 2009 की सरकार में बने थे पंचायत प्रसार अधिकारी
बीकानेर। पंचायती राज में पोल में इतनी ढोल चल रही है कि सराकर की ओर से ग्रामसेवकों को पदोन्नति देकर उनको पंचायत प्रसार अधिकारी बनाने का उद््देश्य धरातल पर कहीं पर भी नजर नहीं आ रहा है। ये पंचायत प्रसार अधिकारी फील्ड में न रहकर कार्यालयों में ‘बाबूगिरी’ करने में लगे है।
प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस की सरकार के कार्यकाल में उस वक्त मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत ने पंचायती राज में ग्रामसेवकों को पदोन्नति देते हुए उनको पंचायत प्रसार अधिकारी बनाया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ग्रामसेवकों को पंचायत प्रसार अधिकारी बनाने की कार्य योजना सिरे चढ़ पाती। उससे पहले ही प्रदेश में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन हो गया।
राजे सरकार ने नहीं दिया ध्यान
प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ग्रामसेवक से बने प्रचायत प्रसार अधिकारियों से कोई खासा काम नहीं ले पाई। ये पदोन्नत हुए ग्रामसेवक सरकारी कार्यालयों में ही डटे रहे और एक बार फिर से प्रदेश में कांग्रेस की गहलोत सरकार आ गई है। देखने वाली बात ये है कि अब गहलोत सरकार इसमें कोई सुधार कर पाती है या नहीं।
ये था उद्देश्य
ग्रामसेवकों को पंचायत प्रसार अधिकारी बनाने के पीछे पंचायती राज को सशक्त व मजबूत बनाना था। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज में विभिन्न योजनाओं के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण, अवलोकन कर वहां काम कर रहे ग्रामसेवकों को दिशा निर्देश देने थे ताकि पंचायती राज के कार्यों को गति मिले। समय पर पूर्ण हो और उनका लाभ लोगों को मिले। किंतु ऐसा कुछ भी नहीं हो पाया। फील्ड में जाने की बजाए ये पंचायत प्रसार अधिकारी सरकारी कार्यालयों में डटे हुए है।
आखिर कौन लेगा निर्णय?
पंचायत समिति वार पंचायतों के कलक्टर बनाकर प्रत्येक कलक्टर की जिम्मेदारी पंचायत प्रसार अधिकारियों को दी गई थी। क्लस्टर क्षेत्र की पंचायतों में होने वाले सभी कार्यों का निरीक्षण, अवलोकन, दिशा निर्देश तथा पैमाइश आदि किए जाने थे। किंतु किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं रह जाने के कारण पंचायत प्रसार अधिकारी गर्मी, सर्दी व बारिश के मौसम में फील्ड में न जाकर पंखे व कूलर के नीचे ही काम करना पसंद कर रहे है तो पंचायत समिति स्तर पर विकास अधिकारियों का कामकाज भी काफी हल्का होने की वजह से वे भी इनको फील्ड में भेजने के लिए कोई रुचि नहीं दिखा रहे है।
लम्बी-चौड़ी फौज, फिर भी काम समय पर नहीं
पंचायती राज में अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, पंचायत प्रसार अधिकारी, कनिष्ठ तकनीकी अधिकारी (जेटीओ), पंचायत विकास अधिकारी (ग्रामसेवक) तथा पंचायतों में रोजगार सहायक, लिपिक सहित लम्बी-चौड़ी कार्मिकों की फौज होने के बावजूद पिछले दो-तीन वित्तीय वर्ष पूूर्व स्वीकृत हुए कार्य लम्बित चल रहे है।
जिला परिषद व पंचायत समितियों में कर रहे बाबूगिरी
वर्ष 2009 की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के अंतिम दौर में ग्रामसेवकों की पंचायत प्रसार अधिकारी के रूप में क्रमोन्नत हुए थे। तब से लेकर हजारों की तादाद में पदोन्नत हुए ग्रामसेवक स्थानीय पंचायत समिति कार्यालयों व जिला परिषद में ही बाबूगिरी का काम कर रहे है। इतना जरूर है कि इन पंचायत प्रसार अधिकारियों की ओर से पंचायत समिति व जिला परिषद में सेवा देने की वजह से इनमें लिपिक व वरिष्ठ लिपिक पद की रिक्तता को इन्होंने जरूर पूरा किया है।
इक्का-दुक्का ही पंचायत प्रसार अधिकारी
ग्रामसेवकों की वरिष्ठता को देखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इनको पंचायत प्रसार अधिकारी बनाया था। इनके पंचायत प्रसार अधिकारी बनने से पूर्व पंचायत समितियों में इक्का-दुक्का ही पंचायत प्रसार अधिकारी हुआ करते थे। किंतु अब पंचायत प्रसार अधिकारियों की लम्बी-चौड़ी फौज है। इसके बावजूद इनका सही ढंग से उपयोग तक नहीं हो पा रहा है।