कर्नाटक : बीएस येदियुरप्पा ने जीता विश्वासमत, स्पीकर पद से केआर रमेश ने दिया इस्तीफा

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने चौथे कार्यकाल के लिए पद की शपथ लेने के दो दिन बाद सोमवार को विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। इसी के साथ, कर्नाटक (Karnataka) में चले लंबे सियासी ड्रामे (Political Drama) का उस वक्त अंत हो गया। उधर, पूरे घटनाक्रम के दौरान लगातार विवादों में रहने वाले और जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के 17 विधायकों को अयोग्य करार वाले के.आर. रमेश ने स्पीकर के पद से अपना इस्तीफा दे दिया।

इस्तीफा देते हुए के.आर. रमेश ने कहा- “मेरी तरफ से अगर कोई गलती हुई हो तो प्लीज उसे भूल जाएं। मैं ऐसा सोचता हूं कि यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। केआर रमेश ने कहा, “मैंने इस पद से खुद को अलग करने का फैसला किया है…मैंने इस्तीफा देने का फैसला लिया है।” उन्होंने उपाध्यक्ष कृष्ण रेड्डी को अपना त्यागपत्र सौंपा।

के.आर. रमेश बोले- संविधान के अनुरुप किया काम

कुमार ने कहा कि अध्यक्ष के तौर पर अपने 14 माह के कार्यकाल में उन्होंने अपने “विवेक” के अनुरूप और संविधान के मुताबिक काम किया। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी क्षमता के अनुरूप अपने पद की गरिमा बरकरार रखने का प्रयास किया।”

केआर रमेश ने कहा- भूल जाएं गलतियां

केआर रमेश ने आगे कहा- सोनिया गांधी ने मुझे कॉल किया था और कहा था कि स्पीकर का चुनाव होना है और गठबंधन में स्पीकर का पद हमें दिया गया है। उन्होंने मुझसे पूछा कि अगर वे इसके लिए इच्छुक हों। केआर रमेश ने कहा- मैं सदन से यह अपील करता हूं कि इस देश में भ्रष्टाचार की जड़ चुनाव है। बिना चुनाव में सुधार किए हम भ्रष्टाचार खत्म करने की बात नहीं कर सकते हैं। चुनाव में सुधार के लिए हमें पैसे नहीं बल्कि इच्छा की जरुरत है। हमें आवश्यक तौर पर प्रस्तावना लाना चाहिए और उसे आगे केन्द्र के पास भेजना चाहिए।

17 विधायकों को ठहराया अयोग्य

इसके पहले, के.आर. रमेश ने दल-बदल रोधी कानून के तहत पहले तीन उसके बाद रविवार को फिर से 14 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिया। इससे पहले, कर्नाटक विधानसभा स्पीकर के.आर. रमेश ने एच.डी. कुमारस्वामी सरकार गिरने के दो दिन बाद कार्रवाई करते हुए गुरुवार को तीन विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया। अयोग्य घोषित किए जाने वाले विधायको में रमेश ए जरकीहोली, महेश कुमथल्ली और आर शंकर शामिल थे। गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा में एचडी कुमारस्वामी बहुमत साबित नहीं कर पाई थी। सदन में बहुमत के पक्ष में सर्फ 99 वोट ही पड़े थे जबकि विपक्ष में 105 पड़े थे।