मोदी 2.0 सरकार के 100 दिनों में शेयर बाजार को 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ

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एफपीआई पर सरचार्ज में बढ़ोतरी से शेयर बाजार को सबसे ज्यादा खामियाजा उठाना पड़ा
इन 100 दिनों के दौरान एफपीआई ने घरेलू बाजार से लगभग 32 हजार करोड़ की पूंजी निकाली
वित्त मंत्री द्वारा अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने को लेकर की गई घोषणाओं का कोई असर नहीं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 100 दिनों में कई मोर्चों पर सफलता गिना रही है, लेकिन इस दौरान शेयर बाजार को बड़े ही संकट के दौर से गुजरना पड़ा है। हालत यह है कि शेयर बाजार के निवेशकों को इस दौरान 14 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। लगातार दूसरी बार केंद्र में एनडीए की सरकार आने के बाद बाजार उत्साहित था, लेकिन कुछ ही दिनों में यह उत्साह काफूर हो गया और लगातार हो रही बिकवाली से निवेशकों की पूंजी में 14 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आ गई। कुल मिलाकर बीते 100 दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुए हैं।

घोषणाएं गई व्यर्थ
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने तथा उसे रफ्तार देने के लिए कई घोषणाएं कीं, लेकिन बिकवाली की आंधी में सब बेकार गया।
संयम रखने की जरूरत
विश्लेषकों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती चक्रीय है और यह खुद दूर होगा, लेकिन इसमें वक्त लगेगा। वे निवेशकों को संयम रखने तथा सुस्ती दूर होने तक इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं।
१४ फीसदी शेयरों में मुनाफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई को दूसरे कार्यकाल की शपथ ली थी, तब से लेकर अब तक बंबई स्टॉक एक्सचेंज में कारोबार करने वाले महज 14 फीसदी शेयर ही मुनाफा देने में कामयाब रहे हैं।
कुल बाजार पूंजी 140 लाख करोड़ बची
बीएसई पर सक्रियतापूर्वक कारोबार करने वाले 2,664 कंपनियों में से लगभग 2,290 कंपनियों को कुल पूंजी का 96 फीसदी तक का नुकसान हुआ है।
४२२ कंपनियां को बेहद नुकसान
इनमें से 422 कंपनियों में 40 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है, 1,372 कंपनियों में 20 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है, जबकि 1,872 कंपनियों को 10 फीसदी से अधिक का झटका लगा है।
पूंजी घटी
इन 100 दिनों के दौरान बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों की कुल पूंजी 14.15 लाख करोड़ रुपये घटकर 140 लाख करोड़ रुपये रह गई।
वित्त मंत्री के उपाय नाकाम
वित्त मंत्री ने विदेशी संस्थागत निवेशकों तथा घरेलू संस्थागत निवेशकों की नाराजगी दूर करने को लेकर बजट में उनपर बढ़ाए गए सरचार्ज को वापस लेने की घोषणा की थी। इस सरचार्ज की वजह से निवेशकों ने मोदी सरकार के 100 दिनों के दौरान घरेलू शेयर बाजार से 31,700 करोड़ रुपये की पूंजी निकासी की।
निवेशकों का रूझान कम
आश्चर्य की बात यह है कि सत्ता में मोदी सरकार के वापस आने की उम्मीद में फरवरी-मई की अवधि में एफपीआई ने बाजार में 83,000 करोड़ रुपये की पूंजी का निवेश किया था। सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने को लेकर हाल में की गई घोषणाएं निवेशकों के रुझान को बदलने में नाकाम रहीं।
सेंसेक्स-निफ्टी में 8 फीसदी तक गिरावट
सेंसेक्स तथा निफ्टी में 7-8 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। सबसे ज्यादा झटका सरकारी बैंकों के शेयरों को लगा है और उनकी एक चौथाई पूंजी डूब चुकी है। निवेशक आशंकित हैं और अपना निवेश ज्यादा सुरक्षित माने जाने वाले आईटी तथा फार्मा सेक्टर्स की तरफ रुख कर रहे हैं। घरेलू अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाले ऑटोमोबाइल तथा बैंकिंग सेक्टर्स को झटके का सामना करना पड़ रहा है।
बुरे दौर से गुजर रही अर्थव्यवस्था
देश की जीडीपी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में पांच फीसदी रही है, जो बीते छह साल का निचला स्तर है। इस दौरान अर्थव्यवस्था को सूचित करने वाले तमाम सूचकांकों की हालत खराब है। लगभग सभी सेक्टर्स में गिरावट का दौर चल रहा है।