..भेडिय़ा कौन ?

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लूणकरनसर के नेताजी ने अपनी ही पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में आयोजित सभा में अपने संबोधन में भेड़ की खाल में भेडिय़ों से बचने की द्घिअर्थी संबोधन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। हालांकि समझने वाले तुरंत ही समझ गए और इसका असर यह रहा कि सभा के खत्म होने के बाद इसको लेकर लोग चर्चा भी करते हुए नजर आए। कुछ लोग जो इस बात को समझ नहीं पाए वे कुछ और ही सोच रहे थे लेकिन राजनीति की समझ रखने वालों को समझ आ गया कि नेताजी ने तीन महीने पहले हुए परिणामों की टीस निकाली है।
फिर मिला मौका…
विधानसभा चुनाव में अपने नेताजी के हारने से हाशिए पर जा चुके कुछ नेताओं को एक बार फिर अवसर मिल गया है। इस बार वो सांसदी का चुनाव लड़ रहे दूसरे नेताजी के साथ जी जान से जुटे हुए हैं। दरअसल, राजनीति करना बड़ा मुश्किल काम है, एक खूंटा साथ होना जरूरी है। ऐसे में ये नहीं तो वेा सही। खैर.. काम तो पार्टी का ही हो रहा है।