राजस्थान के राज्यमार्गों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स वसूली फिर शुरू

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जयपुर, राजस्थान मे राज्यमार्गों (स्टेट हाइवे) पर निजी वाहनों से टोल टैक्स की वसूली एक बार फिर शुरू हो गई। राज्य सरकार ने इस बारे में एक अधिसूचना गुरुवार को जारी की थी। इसके बाद गुरुवार- शुक्रवार मध्यरात्रि से राज्य के सभी राज्यमार्गों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स की वसूली फिर शुरू हो गई। उल्लेखनीय है कि गत भाजपा सरकार ने पिछले साल अप्रैल माह में ही राज्यमार्गों पर निजी वाहनों से टोल टैक्स माफ करने का निर्णय किया था, लेकिन वाणिज्यिक वाहनों पर टोल टैक्स वसूला जा रहा था। मौजूदा कांग्रेस सरकार ने सडक़ों की मरम्मत व रखरखाव लागत का हवाला देते हुए इसे फिर से लागू किया है। राज्य सरकार का कहना है कि राज्य में राज्यमार्गों पर निजी वाहनों को टोल शुल्क में छूट देने के पूर्ववर्ती सरकार के बिना सोचे-समझे व जल्दबाजी में लिए गए फैसले से प्रदेश में सडक़ों की मरम्मत और रखरखाव के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में टोल शुल्क की छूट वापस लेने का प्रस्ताव मंत्रीमण्डल ने जनहित तथा राजकोष पर आने वाली बड़ी देनदारी को देखते हुए किया है। सरकार ने एक बयान में कहा है कि सडक़ों पर टोल लगाने का मुख्य उद्देश्य सडक़ों का सुदृढ़ीकरण व इसके बाद रखरखाव करना है। पूर्ववर्ती सरकार ने। अप्रेल, 2018 से राज्य में निजी वाहनों को 55 राज्यमार्गों पर लगने वाले टोल शुल्क से छूट प्रदान की थी। इस कारण आधार वर्ष 2017-18 के अनुसार 172 करोड़ रूपए के टोल शुल्क का नुकसान हुआ। इसका प्रदेश में सडक़ों की मरम्मत एवं निर्माण कार्यों पर विपरीत असर पड़ा। इसके अलावा छूट से पहले पीडब्ल्यूडी, आरएसआरडीसी और रिडकोर की विभिन्न सडक़ों पर सालाना टोल शुल्क संग्रहण लगभग 851 करोड़ रूपए था। जिससे सडक़ों की निर्माण राशि का पुनर्भरण और मरम्मत कार्य हो रहा था।
विपक्षी दल भाजपा ने इस फैसले को राज्य सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने कहा कि भाजपा की तत्कालीन सरकार ने जनता की मांग पर राज्यमार्गों पर लगने वाले टोल को माफ किया था लेकिन जनविरोधी गहलोत सरकार ने पुन: टोल प्रारम्भ कर राज्य की जनता पर वित्तीय भार डाल दिया।
पार्टी ने सरकार के इस फैसले के विरोध में यहां कलेक्टरी पर धरना दिया और ज्ञापन सौंपा।