बहुमत के बाद भी विचलित नहीं हुए मोदी (डीएनआर संपादक अनुराग हर्ष की बेबाक टिप्पणी)

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अनुराग हर्ष
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई व शुभकामनाएं। जिन परिस्थितियों में पिछले छह महीने से चुनाव प्रचार हो रहा था, जिस भाषा और निम्न स्तर पर जाकर चुनाव लड़ा गया था, उसका अंत जिस तरह प्रधानमंत्री ने किया, वो न सिर्फ उनके व्यक्तित्व को बड़ा करता है, बल्कि एक आम भारतीय की भावनाओं की कद्र भी करता है। प्रचण्ड बहुमत के बाद विचलित हुए बगैर मोदी ने पार्टी कार्यालय में जो उद्बोधन दिया, वो सही मायने में राष्ट्र के नाम एक प्रधानमंत्री का संदेश था। उन्होंने जो तीन वायदे किए हैं, उन्हें सच में आत्मसात करते हैं तो उनकी छवि 2014 से 2019 की छवि से ज्यादा बेहतर बन सकती है। उनके वादों में सबसे पहला वादा था कि बदइरादे व बदनियत से कोई काम नहीं करुंगा। चुनाव के दौरान उन्होंने ‘नामदारों’ को जिस तरह की चेतावनियां दी थी, वो उनके स्तर की नहीं थी। कानून अपना काम करें, फिर जो भी दोषी हो, वो जेल ही जाना चाहिए। बदनियती और बदइरादा प्रधानमंत्री के दायरे में आना भी नहीं चाहिए। उन्होंने दूसरा वादा किया कि मैं अपने लिए कुछ नहीं करुंगा। प्रधानमंत्री का यह वादा उनमें लाल बहादुर शास्त्री की झलक दिखाता है। शास्त्री ही ऐसे प्रधानमंत्री थे, जो झोला उठाकर आए थे, जब गए तब भी उनके पास कुछ नहीं था। मोदी ने तीसरा वादा किया कि मेरे समय का एक-एक क्षण सिर्फ और सिर्फ देशवासियों के लिए समर्पित है। अब तक प्रधानमंत्री अपना पूरा समय वैसे भी देश और पार्टी के लिए ही देते रहे हैं, ऐसे में फिर से इस बात को दोहराना सच में सराहनीय है। यही बात कभी इंदिरा गांधी ने अपने प्रधानमंत्री काल में यह बात कही थी।


इसी दौरान मोदी ने यह भी कहा कि पिछली दफा तो आप मुझे कम जानते थे, लेकिन इस बार आपने मुझे पांच साल परखकर वोट दिए हैं। मोदी को इस बात का आभास हो गया है कि देश ने उनसे बहुत उम्मीद लगा रखी है, देश का अर्थ एकवचन नहीं है, बल्कि एक सौ तीस करोड़ लोगों का विश्वास है। चाहे किसी ने वोट दिया या नहीं दिया। मोदी अब पूरे देश के प्रधानमंत्री है। ऐसे प्रधानमंत्री जिसे नेहरू बाद पहली बार बहुमत देकर कुर्सी दी है। शायद यह पहली बार था कि एंटी इनकमबेंसी शब्द गायब हो गया, नया शब्द स्वयं मोदी ने दिया ‘प्रो इनकमबेंसीÓ। उनके कामकाज और काम करने के तरीके पर जनता ने मुहर लगाई है। मोदी को यह अहसास भी होना चाहिए कि उनके साथ मध्यम वर्ग सबसे बड़ा समर्थक है। आने वाले पांच वर्षों में उसी मध्यम वर्ग का ध्यान रखना होगा। जो सुबह से रात तक मेहनत करके एक घर बनाता है तो उसे आयकर विभाग को जवाब देना पड़ता, बैंक से ऋण ेलेने के लिए अपनी ईमानदारी के हजार सबूत देने होते हैं, अपना सबकुछ बैंक को सौंपना पड़ता है। जिसे जब चाहे तब नौकरी से निकाल दिया जाता है, जिसकी एक कार खरीद का सपना पूरा करने पर पचास विभाग चौकन्ने हो जाते हैं। बस! उस मध्यम वर्ग पर मेहरबानी रखना, रक्षा करना।

जो अपनी जेब से कर देकर राष्ट्र के निर्माण में योगदान देता है, उसी मध्यम वर्ग की जेब कभी पानी के बिल में तो कभी बिजली के बिल में काट ली जाती है। मोदी को ‘मोदीÓ इसी मध्यम वर्ग ने बनाया है, ऐसे में अगले पांच साल इसी वर्ग का ध्यान रखना होगा। उन्होंने अपने भाषण में जिन दो जातियों का जिक्र किया कि गरीब और गरीब को मिटाने की इच्छा रखने वाले ही भारत में है। यहां बताना चाहूंगा कि गरीब और अमीर के बीच एक मध्यम वर्ग भी है जो रोज अमीर होने की कोशिश तो करता है लेकिन बन नहीं पाता। संभावनाओं से भरे देश की धड़कन बनकर उभरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुन: शुभकामनाएं।