बीकानेर – सरकार की दया को तरसते अनाथ…कब मिलेगा पालनहार

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*ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के बावजूद अधिकारी नहीं दिखा रहे दिलचस्पी, जिले में सैंकड़ों आवेदन लम्बित
बीकनेर। जिले में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से निराश्रित व अनाथ बच्चों के लिए चलाई जाने वाली पालनहार योजना अनाथ नजर आ रही है। एक साल से योजना के पुराने लाभान्वित लाभ से वंचित है, वहीं नए आवेदन सत्यापन की फाइलों में अटके पड़े हैं। इतना ही नहीं योजना का भुगतान द्विमासिक तौर पर किए जाने के आदेश भी ठंडे बस्ते में है। स्थिति यह है कि लाभान्वित ग्राम पंचायत से लेकर जिला मुख्यालय तक चक्कर लगाकर थक चुके हैं। आश्चर्य की बात यह है कि सरकार योजनाओं में बजट खूब होने का दावा कर रही है लेकिन यहां कभी बजट नहीं होने तथा कभी लाभान्वितों के डाटा ऑनलाइन प्रक्रिया का हवाला देकर जल्द भुगतान के आश्वासन की गोली देकर रवाना किया जा रहा है।

दु:ख कम करने के बजाए बढ़ा रहा विभाग
योजना ऐसे बच्चों के लिए चलाई जा रही है जिनके सिर पर माता, पिता या पिता का साया उठ गया है। ऐसे बच्चों का पालन-पोषण करने वाले परिवार को पालनहार का नाम दिया गया है। निराश्रित बच्चों का पारिवारिक वातावरण में पालन-पोषण का जिम्मा लेने वाले परिवार को पालनहार योजना केे तहत 6 साल से छोटे बच्चों को 500 रुपए और 6 से 18 वर्ष तक के बच्चे को 1000 प्रतिमाह एवं साल में एक बार एक मुश्त 2000 रुपए की सहायता राशि शिक्षा व अन्य आवश्यक सामान के लिए दी जाती है, परन्तु बीकानेर जिले में नाम मात्र के लाभार्थियों को ही वर्ष में यह विशेष राशि मिल पाती है।

जिम्मेदार कर रहे नजर अंदाज
पालनहार योजना के आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण जिम्मेदार अधिकारी भी टालमटोल कर रहे हैं। इसके क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की है या पंचायत राज संस्थाओं की है। यह अभी भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। हालांकि मोटे तौर पर योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की है लेकिन इसके क्रियान्वयन में मुख्य भूमिका पंचायत राज की है।

ऑनलाइन का अडंगा
वर्ष 2014 के बाद पालनहार योजना में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई। योग्य आवेदक ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया में गत एक साल से सैकड़ों आवेदन लम्बित पड़े हैं। कोई भौतिक सत्यापन के स्तर पर अटका पड़ा है, तो अधिकांश आवेदन प्रथम स्तरीय सत्यापन में ही आवेदक को बार-बार वापस लौटाए जा रहे हैं, जबकि आवेदन के साथ समस्त दस्तावेज संलग्र होते हैं। इतना ही नहीं जांच के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद मूल दस्तावेज जमा कराने की समस्या से आवेदक परेशान है। जबकि राज्य सरकार की पेपर लैस की मंशा है।

क्या है पालनहार योजना
योजना में अनाथ बालक-बालिका, न्यायिक प्रक्रिया से मृत्युदंड अथवा आजीवन कारावास प्राप्त माता-पिता की संतान, पुनर्विवाहित माता की संतान, एड्स पीडि़त माता-पिता की संतान, कुष्ठ रोग से पीडि़त माता-पिता के बच्चे, तलाकशुदा, परित्यक्ता, विकलांग माता या पिता की संतान, नाते जाने वाली व विधवा माता की तीन संतानों तक पालन-पोषण करने वाले परिवारों को लाभ दिया जाता है जिनकी वार्षिक आय 1 लाख बीस हजार सेे कम होनी चाहिए।